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Saturday, April 16, 2011

17.मुझको


जब कोई भी ना रहा कन्धा मेरे रोने को 
घर कि दीवारों ने सीने से लगाया मुझको 

यूँ तो उम्मीद-ए-वफ़ा तुम से नहीं है कोई 
फिर चिरागों कि तरह किस ने जलाया मुझको 

बेवफा ज़िन्दगी ने जब छोर दिया  है तन्हा 
मोत ने प्यार से पहलू में बिठाया मुझको 

वो दिया  हूँ जो मोहबत ने जलाया था कभी 
गम कि आंधी ने सार-ऐ-शाम बुझाया मुझ को 

कैसे भूलूंगाl वो वस्ल के लम्हे 
याद आता रहा जुल्फों का ही साया मुझ को

Monday, March 28, 2011

16.मुस्कुराने कि क्या जरुरत थी


जान ही लेनी थी तो कह दिया होता,
मुस्कुराने कि क्या जरुरत थी
दिन बीत गए रातें कट गयीं
तेरे इंतज़ार में रातें गुजार गयीं
क्या ये मेरा प्यार है,या मेरी गुस्ताखी
या तेरी बेवफाई है या फिर कोई मजबूरी

चमको सितारों कि तरह ये दुआ है हमारी
फ़रिश्ता नहीं इंसान हूँ आखिर मुमकिन है गुस्ताखी
मेरे किसी बात का हरगिज़ बूरा ना मानना ऐ मेरे दोस्त
अगर मुमकिन हुआ तो ज़िन्दगी के किसी मोड़ पर फिर मिलेंगे
धन्यवाद तुझे इस मिलन का ,अभी अलविदा मेरे दोस्त 

तेरे दिल में प्यार कि बुनियाद रखेंगे
खुदको कैद और तुझे आज़ाद रखेंगे
कभी हो ना जाए गुस्ताखी फिर से
इसलिए अपने कदम आपके बाद रखेंगे

गुस्ताखी ये है हमारी हर किसी से रिश्ता जोड़ लेते हैं
लोग कहते हैं मेरा दिल पत्थर का है मगर ऐ दोस्त
कुछ लोग ऐसे हैं जो इससे भी रिश्ता तोड़ लेते हैं

हमारे खून में रब  ने यही तस्वीर रखी है
बुरे भूल जाते हैं अच्छाई याद रखते हैं
मोहब्बत में कहीं हमसे गुस्ताखी ना हो जाए
हम अपना हर कदम आपके बाद ही रखते हैं

अपनी मोहब्बत का दिखावा हम सरे बाज़ार नहीं करते
उसपे वो कहते हैं कि हम प्यार नहीं करते
खबर नहीं है उन्हें मोहब्बत तो आँखों और दिलों कि बाते हैं
इसीलिए गुस्ताखी हम उनसे ये बार बार नहीं करते

चलो " --------"मोहब्बत कि नयी बुनियाद रखते हैं
खुद पाबंद रहते रहते हैं उन्हें आज़ाद रखते हैं
हमारे खून में रब ने यही तस्वीर रखी है
बुरे भूल जाते हैं अच्छाई याद रखते हैं
मोहब्बत में कहीं हमसे गुस्ताखी हो ना जाए
हम अपना हर कदम उनके कदम के बाद रखते हैं 

Sunday, March 27, 2011



15.उसकी एकलौती निशानी


वो कांपती ठंढ में
जग से टुटा खुद से हारा
इंसान नहीं कहलाता वो
उसे कहते हैं सब बेचारा

पता नहीं खुद का नाम उसे
जनम उसे दिया था किसने
ख्वाब कभी देखा नहीं
नींद नहीं पाई थी उसने

न ख़ुशी थी उसके चेहरे पर
न कभी कोई गम की स्याही
हक़ कभी जताया नहीं कभी 
खुद की ज़िन्दगी हुई परायी

महसूस किया कभी नहीं वो
कौन था अपना कौन पराया
साडी जिंदगी वो अकेले काटा
पाया नहीं कभी कोई भी साया

उसकी आँखें कहती थी
जुग जुग की अनमोल कहानी
यही है उस बेचारे की कथा
मृत शरीर उसकी एकलौती निशानी 

14.मंजिल तक वो जाता है


ज़िन्दगी के सफ़र में
आते हैं इम्तिहान कई
इसका ये मतलब नहीं कि
थक जाए इतने में कोई 

हर परेशानिया जो रह में आती है
नए परेशानी का सामना करना शिख्लाती है
जूझना ही होता है हमें
तभी मंजिल करीब आती है

साथ चलने वाले कभी
आगे निकल जाते हैं हमसे
इसका मतलब ये नहीं
डर जाएँ हम कभी किसीसे

ये पीछे परना भी हमें 
बहुत कुछ सिखलाता है
आशा(माँ) का दमन जो ना छोड़े कभी
मंजिल तक वो जाता है

13.१ हसीं सि गुस्ताखी


फिर दिल ने कहा
दिल लगाओ किसी से 
मैंने दिल को समझाया
प्यार किया किसी १ से

दिल तो भोला है नादान भी
दुनिया से अनजान भी
लाख चोट खाए है इसने फिर भी
गलतियों से कुछ ना सीखी
खामख्वाह कर बैठा ये 
१ हसीं सि गुस्ताखी

12.मुझमे मिल जाना


मै सुर बनू
तुम अल्फाज़ देना
मै ले बनू 
तुम अंदाज देना

मै साया बनू
तुम साथ चलना
मै हवा बनू
तुम डाली सि मचलना

काश मै चाँद बनू
तुम तारों सि टिमटिमाना
खूब मचलना
खूब झिलमिलाना

सफ़र है बड़ा
ऐ हमसफ़र मेरे
हर मोड़ पर तुम यूँ
आना और मुझमे मिल जाना