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Saturday, April 16, 2011

30.टोपी वाला छोटा बन्दर


टोपी वाला छोटा बन्दर
जा पहुंचा सर्कस के अन्दर 
पहले तो झूले पर झुला
झुला तो फिर सुध-बुध भुला

फिसल पड़ा जा गिरा धराम
पूंछ ना उसके आया कम 
गिरा शेर के पिंजड़े के अन्दर 
टोपी वाला छोटा बन्दर

डर के मारे मर गयी नानी 
लगा मांगने पानी-पानी
कहा शेर ने उसे उठाकर
पानी है थर्मस के अन्दर

पीकर चल देना तू भाई 
मुझे जोर कि नींद है आई 

29."सिर्फ तुम "


वसंत का था वो महिना जब 
झोंका तेज हवा कि लहराई थी
14 feb था, दिन वो जब 
याद तुम्हारी आई थी 

आज कि शाम को 
महफ़िल काफी जमी थी
आये थे सब मगर 
सिर्फ तेरी ही कमी थी 

वसंत का खुशबु भरा झोंका 
दिल को तरसा सि जाती थी 
हर तरफ चाय खुमार 
पर याद तुम्हारी आती थी 

आपका १३ को रूठना 
फिर मुझे याद भी करना 
आपसे प्यार कि चाहत 
और छोटे बातों पर लड़ना

आप रूठे हम मनाये 
आप खाएं हम खिलाएं 
आपकी छोटी गलतियों पर 
आप डरें और मुझे हसाएं 

मुझे याद है आपकी हर हरकत 
कुत्तों से डरना फिर डर के चिल्लाना 
साया मेरा लेके खुद को बचाना
फिर जोर से हँसाना मुझे भी हँसाना

हंसी आपकी जैसे झड़ने का पानी 
हंस कर हाथो को जोड़ से हिलाना 
कहकहे लगाके यूँ मुस्कुराना 
गुस्सा में खुद पर यूँ बडबडाना

रूठ कर भी दूर ना जाना
जन्मदिन का केक भिजवाना 
साथ में वो फूल कि बुके 
भिजवाकर मुझे रुलाना

आज भी वो याद है 
आपका प्यार आपका दुलार 
तुम गए क्यूँ मुझे छोड़ कर
ऐ मेरे हमदम ऐ मेरे प्यार

मै जनता हूँ सायद कभी आप माफ़ ना करो मुझे
फिर भी १ कोशिश कर लेना 
बहुत प्यार करता है ये BJ आपसे 
सिर्फ १ मौका और देना 

आपकी बिना ये पल हम गुजार ना सकेंगे 
ज़िन्दगी कि रह को ना बिता सकेंगे  
आपके बिना हम हैं अधूरे 
पूरा किसी ख्वाब को कर ना सकेंगे 

इन्ही सोचों में ना जाने कहाँ 
दिल हो जाता है अक्सर गुम
मै जनता हूँ ऐ हमनशीं 
दिल चुराने वाले हो 
"सिर्फ तुम सिर्फ तुम"

28.आपकी याद दिलाती है


आपकी याद में तन्हा
आपकी यादों में खोया रहता हूँ 
गए आप क्यूँ मुझे छोड़कर 
सोच के रोया करता हूँ 

शायद वो थी आपकी वफाई
मैंने कि कुछ थी वेवफाई 
कुछ राजों को था मैंने छुपाया 
शायद इसीलिए कुछ पल आपके करीब आया 

डरता था कि हकीकत जान कर 
आप भी छोड़ दोगे मेरा हाथ  
कुछ सच छुपाके था मिला 
आपका वो खुबसूरत साथ 

आपके बिना ना मर पाया 
नहीं ही चैन से जिया है 
मिल चुकी थोड़ी सजा
जो गलती BJ ने किया है 

आ जाओ लौट कर बहार बनके 
१ एहसान और कर दो 
सुनी पड़ी है ज़िन्दगी मेरी
फिर से इसे रौशन कर दो 

आपकी अनदेखी अब  मुझे 
अक्सर ही रुलाती है 
आपका हँसना और हँसाना 
आपकी याद दिलाती है 

27.मुफलिसी कि यही निशानी


उघडा पर्स ,टूटी चप्पल
बेरंग कपडे , जेब है खाली
मुफलिसी कि यही निशानी 
       खाने के डब्बे में रोज
       नापसंद सब्जियों के टुकड़े
       क्योंकि होती है वो ज्यादा सस्ती
       ४ कि जगह उसे सिर्फ २ ही खानी 
        मुफलिसी कि यही निशानी
१० रुपैये के टिकिट के  बजाय
५ रुपैये कि टिकिट चुपके से लेना 
भर लाता  है जिसके आँखों में पानी
मुफलिसी कि यही निशानी
        मुन्ने कि पुरानी स्कूली ड्रेस को रंगवाना
         सिने में उथलपुथल हो फिर भी 
         होंठो पर मुस्कराहट का लेबल चिपकाना
         हर जरुरत को अगले महीने तलने कि कहानी 
         मुफलिसी कि यही निशानी

26.बेचारी


फटे पुराने कपड़ों में
ले ली उसने १ अंगराई
मुस्कान थी उसकी बिलकुल झूठी
आँखों में सागर से गहरी खाई 

         झूठे पत्तलों को छांटना 
         दो दानों को निकालती वो
         डर के खाती  १ दाना 
         बाकी को संभालता वो 
कुछ कुत्ते उसके पीछे पड़े
उनसे भी उसे जूझना था
भूखे बच्चों कि खातिर 
और दाने भी चुनना था 
        चाहत थी उसकी मुट्ठी भर खाने कि
         पर यहाँ कुछ दाने भी मुस्किल हुई 
        समेत कर चल दी  बेचारी 
        जो चंद दाने उसे हासिल हुई 
मुस्कुराना गुनगुनाना
 सब झूठी उसकी कहानी थी 
हालत उसकी भली हो ऐसी
पर दुनिया से अनजानी थी 

25.BJ के ख्यालों में आने वाली


वो बलखाती तितली सि
नादान सि वो भोली भाली
हंसती  तो झुक जाते उसके लट
जैसे बसंत में आम कि डाली 
            उसका हँसना मुस्कुराना 
            जिद करना फिर इतराना
             अल्हड़पन में कुछ कर जाना
           फिर घबराना और शरमाना
कोयल जैसी बोली उसकी
हिरनी जैसी चाल
हज़ार पर्दों के जैसे
उसके सुनहरे बाल
           वो कोई दीवानी सि होगी
            BJ के ख्यालों में आने वाली 
           रंग उसके दूध से सफ़ेद 
           गालों कि रंगत थोड़ी लाली
पता नहीं वो होगी कहाँ
उसका क्या है पता
सोचता हूँ जब कभी  ऐसा
पाता हूँ खुद को लापता

24.१ पत्थर से दिल लगाये बैठा हूँ


वो प्यार था या गलती 
जिसका ना था मुझे एहसास
सागर क था बिलकुल करीब
पर थी १ बूंद कि प्यास
       पाने को जिसके खातिर
      मैंने जीना सुरु किया  
       कुछ अंतरालों में
       मुझसे खुद को दूर किया
जिसकी उम्मीद लगा रखी थी मैंने
उसने ही मुझे अकेला छोड़ा 
अरमानो के सपने दिखा कर
उसने झट से नाता तोडा
     जब से है वो मुझसे रूठी
     प्यार १ बकवास है 
     बात सारी उसकी झूठी
उम्मीद में उसके आज भी मैं
सैकड़ों दिए जलाये बैठा हूँ
आस नहीं उसके आने कि
पर क्या करूँ???
१ पत्थर से दिल लगाये  बैठा हूँ