POEMS FROM BJ
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Sunday, March 27, 2011
13.१ हसीं सि गुस्ताखी
फिर दिल ने कहा
दिल लगाओ किसी से
मैंने दिल को समझाया
प्यार किया किसी १ से
दिल तो भोला है नादान भी
दुनिया से अनजान भी
लाख चोट खाए है इसने फिर भी
गलतियों से कुछ ना सीखी
खामख्वाह कर बैठा ये
१ हसीं सि गुस्ताखी
12.मुझमे मिल जाना
मै सुर बनू
तुम अल्फाज़ देना
मै ले बनू
तुम अंदाज देना
मै साया बनू
तुम साथ चलना
मै हवा बनू
तुम डाली सि मचलना
काश मै चाँद बनू
तुम तारों सि टिमटिमाना
खूब मचलना
खूब झिलमिलाना
सफ़र है बड़ा
ऐ हमसफ़र मेरे
हर मोड़ पर तुम यूँ
आना और मुझमे मिल जाना
11.मजदूर
खुशियों से है बहुत दूर
फाटे कपडे और मजबूर
१ वक़्त कि रोटी पाए
बेबस होता है १ मजदूर
खुश दिखना भी उनकी
आदत में होती है मशगुल
खुश करने कि चाहत में
जाए वो खुद के गम भूल
ना कोई घर,ना कोई दिखाना है
बढता है वो धीरे धीरे
ऐसे ही आगे जाना है
उसके सर ना छत पक्के का
ना ही प्यार का साया है
कम करना पेट के खातिर
महँ मजदूर कहलाया है
10.अच्छा लगता है
मुझे तुम्हारा आँख चुराना अच्छा लगता है
१ पल में रूठना फिर मन जाना अच्छा लगता है
खुद तुम मुझे छुपा कर देखो मै देखूं तो चुप जाना
ना ना कर तेरा मेरे बाँहों में आना अच्छा लगता है
नव प्रभात कि किरणों का आना
तुमको अपने सपने में पाना अच्छा लगता है
पीपल के डाली सा इतराना
कभी इतराना कभी नैन मटकाना
मासूम सा फिर चेहरा बनाना अच्छा लगता है
जीवन गुजारूं बस तेरे ही बाँहों में
तेरे बाँहों में सोना अच्छा लगता है
9.मुझमे मिल जाना
मै सुर बनू
तुम अल्फाज़ देना
मै ले बनू
तुम अंदाज देना
मै साया बनू
तुम साथ चलना
मै हवा बनू
तुम डाली सि मचलना
काश मै चाँद बनू
तुम तारों सि टिमटिमाना
खूब मचलना
खूब झिलमिलाना
सफ़र है बड़ा
ऐ हमसफ़र मेरे
हर मोड़ पर तुम यूँ
आना और मुझमे मिल जाना
8.ज़िन्दगी में
ख़ुशी ही ख़ुशी है यहाँ ज़िन्दगी में
ग़मों कि जगह है कहाँ ज़िन्दगी में
कटेगा ये मुस्किल सफ़र मुस्कुराकर
मिले सच्चा साथी जहाँ ज़िन्दगी में
हुए कब हैं पुरे अरमान किसी के
मिला किसको सब है यहाँ ज़िन्दगी में
घर से बहार खुला आसमान है
जरा झांक के आओ वहां ज़िन्दगी में
ना जाने हैं कितने शक्लें यहाँ पर
मुखोटों के पीछे यहाँ ज़िन्दगी में
तजुर्बा नया सिखाता है जो लम्हां
रहता किसे याद ये ज़िन्दगी में
छलों यारों हम भी समझ लें इन्हें
ये जो दो चार पल हैं यहाँ ज़िन्दगी में.
7.हर पल रोने कि आदत नहीं
ऐ दिल तू उदास ना होना
चाहे कितना भी आए रोना
तू अलबेली तू है अनमोल
खुल के जरा गम अपने बोल
बाँट दे कुछ अपने गम का हिस्सा
सुना मुझे वो करूँ किस्सा
जिसे झेल के तू है रोई
कई रातों से अब तक ना सोई
इन्तजार अब ही होता है तेरा
होना ना सकी तू मेरी और मै तेरा
फिर भी १ गुंजाईश कि उम्मीद
लगाये बैठा है दिल मेरा
दूरियां चाहे हो अनंत
होगा उसका भी सुखद अंत
मै जरुर १ दिन आऊंगा
बस्टर ही हो कर रह जाऊंगा
ना कभी चाही दुनिया भर कि दौलत
ना ही कोई हीरे और मोती
अरमान सजाये बस १ ही
काश जो तुम मेरी होती
हाँ चालिया था मै बड़ा
पर प्यार वो मेरा निश्छल था
ऐसी सच्चे प्यार का क्या
१ सुनहरा ये फल था ??
BJ ने मुस्किल से दिल लगाया
१ बार फिर से ठोकर खाया
अब और ठोकर कि चाहत नहीं
मुझे अब हर पल रोने कि आदत नहीं
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